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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Nov 2022

    निर्बीज क्यों हो चले हम!

    आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…

  • 10th Feb 2026

    सुराही उलट दी!

    ये साक़ी की दरियादिली तोबा तोबा,सुराही उलट दी पिलाने से पहिले। बलबीर सिंह रंग

  • 10th Feb 2026

    बुलाने से पहिले!

    जहाँ ग़म के मारों की महफ़िल लगी हो,वहाँ बंदा हाज़िर बुलाने से पहिले। बलबीर सिंह रंग

  • 10th Feb 2026

    मगर हम न पहुँचे !

    वहाँ आती जाती रही सारी दुनिया,मगर हम न पहुँचे बुलाने से पहिले। बलबीर सिंह रंग

  • 10th Feb 2026

    कबूतरी को दाना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अल्हड बीकानेरी जी की एक छोटी सी हास्य कविता अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****

  • 10th Feb 2026

    मुस्कराने से पहले।

    फ़लक़ की निगाहें ठहरती नहीं हैं,ये क्या कर दिया मुस्कराने से पहले। बलबीर सिंह रंग

  • 10th Feb 2026

    प्यार का पहला खत!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे हस्तीमल हस्ती जी ने लिखा और जगजीत सिंह जी ने बहुत सुंदर तरीके से गाया था- प्यार का पहला खत लिखने में वक़्त तो लगता है! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****

  • 10th Feb 2026

    तुम्हीं याद आए!

    तुम्हीं याद आए भुलाने से पहिले,भुलाने से क्या भूल जाने से पहिले। बलबीर सिंह रंग

  • 10th Feb 2026

    अलविदा श्रद्धेय!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता– अबकी बार लौटा तोबृहत्तर लौटूँगाचेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहींकमर में बाँधे लोहे की पूँछें…

  • 9th Feb 2026

    हीर से बातें की हैं!

    कै़स की लैला या फरहाद की शीरी कह लो,हम नहीं राँझा मगर हीर से बातें की हैं। बलबीर सिंह रंग

  • 9th Feb 2026

    जबकि जल्लाद की!

    मौत के डर से मैं खामोश रहूँ, लानत है,जबकि जल्लाद की शमशीर से बातें की हैं। बलबीर सिंह रंग

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