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निर्बीज क्यों हो चले हम!
आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम ठाकुर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत– इस तरह निर्बीज -सेक्यों हो चले हम आजहरियल घास…
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सोच कर इस जहाँ के बारे में!
सोच कर इस जहाँ के बारे में,ख़ुद को क्यूँ शर्मसार कर लिया जाए। राजेश रेड्डी
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उल्टे-सीधे गिरे पड़े हैं पेड़!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं श्री सूर्यभानु गुप्त जी की एक और ग़ज़ल के कुछ शेर अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ-उल्टे-सीधे गिरे पड़े हैं पेड़, रात तूफान से लड़े हैं पेड़! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। *******
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मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने बुने!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैंने अपने स्वर में आनंद फिल्म के लिए मुकेश जी का गाया यह अमर गीत प्रस्तुत करने का प्रयास किया है- मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने बुने, सपने सुरीले सपने! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******